तेरा आना मेरे दिल की(आध्यात्मिक)-265
तेरा आना मेरे दिल की,
घन्टियॉ सी बजा जाता है ।
मेरे मन में विचारों की,
झड़ियॉ सी लगा जाता है ।
पर ये क्या..?तुम्हारे सामने आते ही,
मन कहॉ खो जाता है ।
वो आवाज़ें, वो घन्टियों का बजना,
सब कुछ,न जाने कहॉ खो जाता है ।
मैं कहीं गहरे में चली जाती हूँ,
तुम्हें अपने सामने पाकर ।
सारी ख़ुशियाँ, तमाम ग़म,
तुम ही समा लेते हो अपने भीतर ।
तेरे आने से मेरा चमन,
रौशन हो जाया करता है ।
तू न हो तो माहौल भी,
ग़मगीन हो जाया करता है ।
मोहब्बत के चिराग़ों को हमेशा,
मैंने जलते-बुझते ही देखा है ।
सिर्फ़ तेरा ही है ऐसा चिराग़,
जिसको हमेशा जलते ही देखा है ।
हमेशा इस चिराग़ को तुम,
जलाये ही रखा करना ।
यादों के पिटारे में इसे तुम,
बसाये ही सदा रखना ।
जब कभी मुझको भूल जाने की,
तुम कैसे भी करोगे जुर्रत ।
वादा है मेरा तुमसे ये चिराग़ ही,
तुम्हें फिर से दिलायेगा फ़ुरसत ।
👣🙏🏻
26/1/18
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