दाता कहॉ(आध्यात्मिक)-259
दाता कहॉ तुम रहते हो अब,
कहॉ ठिकाना तुम्हारा है ।
दिल के अलावा और भी जगहें,
जहॉ तुम्हारा वासा है ।
कभी तो मुझको भी दिखलाओ,
दुनिया की तुम सैर कराओ ।
तुम तो घूमे अन्तरिक्ष तक,
मुझको अपने सँग ले जाओ ।
कैसी इच्छा...क्या अभिलाषा..?
मैं भी तुमसे करती हूँ ।
बच्चों जैसी ज़िद है मेरी,
सोच के मैं भी हँसती हूँ ।
क्या कहूँ,मैं कैसे समझाऊँ,
दिल तो अभी भी बच्चा है।
तुम भले ही कितने समर्थ हो,
पर मेरा दिल तो कच्चा है ।
मेरी जन्नत,मेरा सहारा,
मेरी लाठी तुम ही तो हो।
जैसे "सूर" के साथ में चलते,
मेरे साथ भी चलते हो ।
.....पग-पग ध्यान रखते हो ।
👣🙏🏻
29/1/18
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