नारी ने सम्मान से अपना(सामाजिक)-335
नारी ने सम्मान से अपना ,
जीवन जीना सीख लिया ।
तभी तो सुन्दर प्रेममयी ,
संसार को तुमने जीत लिया ।
अग्नि परीक्षा समय-समय पर,
पहले भी दी है तुमने ।
शौर्य और अधिकार जताकर ,
फिर हुँकार भरी तुमने ।
जगतस्वामिनी नारी अब तुम ,
फिर से....फिर से उदघोष करो ।
मैं शक्ति हूँ.... मैं श्रद्धा हूँ ,
अपमान मेरा तुम यूँ न करो ।
तू जगन्मयी, तू जगजननी ,
स्त्री-पुरुषों को पैदा किया ।
जो तुमको नीचा दिखा सके ,
ऐसी उनकी औक़ात है क्या ?
हे बगलामुखी, हे त्रिपुरसुन्दरी,
दुनिया का पोषण करती मॉ ।
तुम शक्तिस्वरूपा अँम्बा हो ,
हो प्यारी मेरी गायत्री मॉ ।
धरती-जीवन की पोषक मॉ।
👣🙏🏻
11/1/18
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