दाता मेरे कैसे कैसे(आध्यात्मिक)-339
दाता मेरे...कैसे-कैसे,
दिशा दिखाते जाते हो ।
कब क्या करना,कैसे करना,
अदरश(अदृश्य) होकर बतलाते हो ।
कहूँ तुम्हें अब क्या प्यारे तुम,
प्रीतम सबसे बढ़कर हो ।
तुमसे मैं क्या-क्या कह जाती,
सुनते सब अन्दर से हो ।
रोना-धोना,ग़ुस्सा-वुस्सा,
सब कुछ तुम सह जाते हो ।
पल में ही सब कुछ सहकर भी,
मुझको तो ख़ूब हँसाते हो ।
दुनिया इसे पागलपन कहती,
लेकिन मुझे नहीं लगता ।
जिसने भी तुझको चाहा है ,
काम नहीं वो कुछ करता ।
काम भी क्या है.....? तेरी...मेरी,
मेरे बस की बात नहीं ।
दुनिया के ख़ास फ़साने ऐसे,
........जिनमें मैं नालायक हूँ ।
...........केवल तेरे लायक हूँ।
👣🙏🏻
17/1/18
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