प्यार हो तुम(आध्यात्मिक)-331
प्यार हो तुम मेरा ध्यान हो तुम ,
जप तप पूजा पाठ हो तुम ।
कैसे बताऊँ गुरूवर तुमको ,
जीवन का आधार हो तुम ।
पल-पल छिन-छिन डोर को पकड़े,
ख़ूब नचाते नाच हो तुम ।
दॉयें- बॉयें गोल घुमाकर ,
दिखलाते आकाश हो तुम ।
धरती पर चलना सिखलाते ,
थक जाती तो कन्धे बिठाते ।
कैसे-कैसे लाड़ लड़ाते ,
गुरूवर अच्छे पिता हो तुम ।
दुनिया की रंगत दिखलाते ,
उँगली पकड़ दूर ले जाते ।
बियावान जँगल में जाकर ,
लाखों सुन्दर दीप जलाते ।
लाड़-प्यार पाकर ही मैंने ,
अपना जीवन सफल बनाया ।
मॉ का ऑचल, तुम्हारी उँगली ,
पकड़के मुझको चलना आया ।
गुरूवर दाता प्यार हमेशा ,
मुझको तुम करते रहना ।
रिध्दि-सिध्दि कुछ न चाहिये ,
प्यार की सिध्दि दे देना ।
.......प्यार सदा करते रहना ।
👣🙏🏻
5/1/18
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