पल में हँसना(आध्यात्मिक)-258
पल में हँसना,पल में रोना,
ऐसा क्यों..हो जाया करता है ।
सामने मेरे तुम होते हो जब,
दिल बाग़-बाग़ हो जाता है ।
कान्हा मेरे तुम्हें देखकर,
दिल की बगिया खिल उठती है ।
मुरझाये जो फूल पड़े थे,
वो कलियाँ भी खिल उठती हैं ।
हर लम्हे में गीत लिखे जो,
वो याद तुम्हारी दिलाते हैं ।
दिल में सज़ा रखे जो सपने,
आज हक़ीक़त बन जाते हैं ।
मैं तो क्या..?पशु पक्षी तक भी,
गीत प्यार के गाते हैं ।
तुम जैसे वसन्त के आते ही,
आपस में चोंच लड़ाते हैं ।
याद तुम्हारी लेकर आता,
जब भी कोई नव वसन्त है ।
पीले फूलों-पीली यादों के,
झरने सा बहता वो वसन्त है ।
.......याद दिलाता वो वसन्त है ।
........देता मुझको नव जीवन है ।
👣🙏🏻
30/1/18
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