मेरा हौसला बढ़ाना(आध्यात्मिक)-266
मेरा हौसला बढ़ाना,
हिम्मत भी देते रहना ।
कभी प्यार आये ज़्यादा,
रुसवाई(बदनामी) देते रहना ।
मैंने सुना है जब भी,
रुसवाई देते हो तुम ।
पिछले सभी करम को,
ख़ुद काटते हो तब तुम ।
अच्छा है कुछ करोगे,
कुछ तो करोगे तुम भी ।
मैंने न तुमको देखा,
करते हुये है कुछ भी ।
दस्तूर तुम बनाते हो,
दुनिया के कुछ अलग ही ।
दस्तूर से जुड़ो तुम...भी,
ख़ुश हो जाऊँ मैं तभी ही ।
दस्तूर क्या तुम्हारा.....?
मैं तुमको कुछ बताती ।
आगे है तुमको चलना,
पीछे से मैं हूँ....आती ।
रुसवाई जितनी होगी,
तुम झेलते चलोगे ।
सब कुछ ही तुम सहोगे,
मुझसे न कुछ कहोगे ।
तुम भी तो यही करते,
पीछे ही छुपे रहते ।
कभी सामने न आकर,
किसी को भी कुछ न कहते ।
छुप-छुप के तेरा रहना,
मुझको नहीं सुहाता ।
तेरा प्यार यूँ जताना,
मुझको नहीं है भाता ।
कभी सामने तो आओ,
सबको बता सकूँ मैं ।
तेरे प्यार के तराने,
ख़ुश हो के गा सकूँ मैं ।
.........कुछ गुनगुना सकूँ मैं ।
.........तुमको रिझा सकूँ मैं ।
👣🙏🏻
26/1/18
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