पूजा विधायें कुछ भी(आध्यात्मिक)-346

पूजा-विधायें कुछ भी,
मुझको समझ न आती ।
पाने की तुमको कुछ भी,
क्रियायें न मुझको आती ।

जितने भी सब यतन है
पाने के लिये हैं तुमको ।
मुझको तो कुछ यतन भी,
आता नहीं समझ में ।

कान्हा की गोपियों ने,
क्या मँत्र हैं जपे थे ।
बस याद में बिलखना,
ये.....ही तो टोटके थे ।

मेरी आत्मा तुम्हीं हो,
और प्राण भी तुम्हीं हो ।
मेरी तो हर क्रिया में,
रमते ही बस तुम्हीं हो ।

हँसता हुआ सा चेहरा .
होता है सामने जब ।
जप-तप,यज्ञ-हवन भी,
हो जाते मेरे तब-तब ।

कुछ दर्द कम हो जाता,
 आते रहा करो तुम ।
ये सिलसिला बराबर,
कुछ दिन तो यूँ रखो तुम ।

तुम्हें देखते ही रहना,
यह भी तो एक यतन है ।
त्राटक नहीं समझती,
ये भी तो एक जतन है ।

                               👣🙏🏻
                          19/1/18

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