क्रान्ति युग(आध्यात्मिक)-333
क्रान्ति युग बदलने की,
दे गये मशाल हाथ ।
ख़ुद को बदलने की ,
कह गये अहम् बात ।
जो न कर सका कोई ,
वो कर दिखाया है ।
केवल देश ही नहीं ,
पूरे विश्व में गवाया है ।
सदबुध्दि का मंत्र एक ,
गायत्री मंत्र दे दिया ।
हवा-पानी-धूप ने भी ,
यही गुनगुनाया है ।
काल के कपाल को ,
तुमने थपथपाया है ।
तभी तो सारा विश्व ,
लोहा मान पाया है ।
ऐसे गुरु की शरण ,
कैसे न जायें हम ।
जिनसे सभी ने ही ,
पिता का प्यार पाया है ।
दिये काम आपने जो ,
आगे बढ़ाते चलें ।
वो मशाल आगे के ,
हाथों में थमा चलें ।
ऐसी शक्ति प्रेरणा ,
हमेशा मिलती रहे ।
मन वचन कर्म से ,
शरणागति बनी रहे ।
....भक्तिभाव बनी रहे ।
👣🙏🏻
9/1/18
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