आंखन देखी(आध्यात्मिक)-210
चलती-फिरती इस काया से,
गुरुवर सबका भला करना ।
मन औ वचन,कर्म तो हैं ही,
परछाईं से भी भला करना ।
जब तक जीवन है दुनिया पर,
और अन्तरिक्ष में जाते भी ।
कण-कण से भी कष्ट को हरना,
मौजूद यहॉ है जितने भी ।
आस-पास की पीड़ा देख के,
मन विचलित हो जाता है ।
क्या हुआ इस देश के बच्चों को,
सोच के दिल भर जाता है ।
गुरुवर दाता कष्ट-हरण तुम,
इन सबकी पीड़ा हर लो ।
छोड़ गये जो इस दुनिया को,
उनका भी तुम भला कर दो ।
और नहीं तो इस दुनिया में ,
घर-घर प्रेम जगा दो तुम ।
आपस में सब प्रेम करें ,
सबमें सद्भाव जगा दो तुम ।
धीरे-धीरे इस दुनिया से,
वैमनस्य चला जायेगा ।
प्रेम की वारिश हर पल होगी,
फिर से राम-राज्य होगा ।
.....हर इन्सान सुखी होगा ।
👣🙏🏻
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