दाता प्यारे आ जाओ(आध्यात्मिक)-340
दाता प्यारे आ जाओ या ,
कुछ तो ख़ैर ख़बर दे दो ।
कौन गॉव औ कहॉ ठिकाना ,
जहॉ अब प्यारे रहते हो ।
दुनिया के झँझावतों से ,
तुम भी शायद ऊब गये ।
तभी तो सबको छोड़ छाड़कर ,
तुम भी यहॉ से चले गये ।
कहने को ... तुम दूर नहीं ,
रहते हो दिल के भीतर ।
लेकिन दिल तक कैसे पहुँचे ,
काम बड़ा टेड़ा अन्दर ।
ध्यानावस्था....तुरियावस्था....,
जाने कौन.. अवस्था है ?
याद के आगे काम न करती ,
कोई....ध्यानावस्था है ।
ज्ञान...कर्म...के आगे भक्ति ,
आज हुई है क्यों बेकार ।
तुम तो शायद..याद न करते ,
तभी न आता तुमको प्यार ।
राधा,रूकमिन,मीरा तक तो,
प्यार के आगे हुईं लाचार ।
नाम तुम्हारा हरपल जपतीं ,
केवल - केवल नाम अधार ।
👣🙏🏻
17/1/18
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