ख्वाब में आना तेरा(आध्यात्मिक)-273
ख़्वाब में आना तेरा ,
अच्छा लगता है मुझको।
नींद में भी जागते,
रहने का अहसास होता है ।
रात भर ख़ुशी से,
साथ रहती हूँ मैं तेरे जब भी ।
ख़्वाबों के टूटते ही मुझपै,
ग़मों का "क़हर"टूट पड़ता है।
क्यों न मुझको रात-दिन,
नींद में ही रहने दिया जाये।
इसी बहाने ही सही तेरी,
निगाहें-करम तो रहेगी ही ।
मुझको इशारे समझ नहीं,
आते हैं तुम्हारे कभी भी ।
फ़क़ीरों की तरह गहराई,
भरी बातों में उलझाया न करो ।
माना कि दुनिया की नज़र में तुम,
बहुत बड़े फ़क़ीर हुआ करते हो।
पर..क्या करूँ इस दिल ने तुम्हें,
.........उससे भी बड़ा जाना है ।
सीधी-सादी बातें ही केवल,
मुझको समझ में आती हैं ।
कुछ तो समझो मुझको.....?
कुछ तो समझाया भी करो ।
ज़ख़्म दिल के गहरे हैं बहुत ही दाता,
क्या कहूँ कबसे नासूर बने बैठे हैं ।
आते हो जब भी कभी तुम,
इस नाचीज़ के ख़्वाबों औ ख़यालों में ।
तो गुज़ारिश है कि मरहम भी लगा जाया करो ।
.....नज़र भर के देख भी जाया करो
.........कभी तो देख के मुस्कुराया करो ।
👣🙏🏻
22/1/18
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें