जडें हमारी आप हैं गुरुवर(आध्यात्मिक)-338
जड़ें हमारी आप हैं गुरुवर ,
हम केवल शाखायें हैं ।
पत्ते, फल और फूल लगे जो,
तुम दोनों की आशायें हैं ।
पता नहीं कितने जन्मों से,
आपने खाद और पानी दिया ।
तब जाकर पल्लवित हुये हैं,
मॉ ने कितना प्यार दिया ।
पीढ़ी दर पीढ़ी आपके वँशज,
बीज से "बड़" का पेड़ बनें ।
ताकि आपके सँरक्षण में ही,
काम को आगे बढ़ा सकें ।
सँसारी मॉ-बाप न जाने,
कितने अदले-बदले होंगे ।
शक्ति स्वरूपा मात-पिता तुम,
हर जीवन में एक हीं होंगे ।
तभी तो अपनी आशाओं के,
दीप जलाकर रखे हैं ।
कहॉ से सबको ढूँढ-ढूँढ कर,
अपनी गोद में रखे हैं ।
हम सन्तानें शरणागत हैं,
जैसे चाहो चला लेना ।
रस्ता कभी भटकने न पायें,
ऐसी शक्ति हमें देना ।
👣🙏
17/1/18
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