वायु-प्रदूषण,(आध्यात्मिक)-270
वायु-प्रदूषण,ध्वनि-प्रदूषण,
अन्य भी ठीक कराने हैं ।
इसीलिये यज्ञों की श्रँखला,
चला रखी तुमने गुरुदेव ।
बड़े-बड़े वैज्ञानिक हारे,
बड़े-बड़े सँसाधन हारे ।
लेकिन सबसे प्रखर वैज्ञानिक,
...तुम्हीं हुये मेरे गुरुदेव ।
हर बालक अपने मात-पिता के,
गुणगान किये ही करता है ।
गुणगान नहीं येसच्चाई है,
हर बन्दा यह जान गया है ।
गायत्री के महामंत्र ने अब तक,
कितनों का उद्धार किया है ।
मरणासन्न पड़े जो अब तक,
उनमें नवसँचार किया है ।
सूक्ष्म में रहकर भी तुमको,
चैन कहॉ है मेरे गुरुदेव ।
जब तक दुनिया सुखी न होगी,
तब तक तुम होंगे बेचैन ।
हमारे मन का तिनका-तिनका,
और ख़ून का क़तरा-क़तरा ।
काम आ सके यदि आपके,
ले लेना हमारे मनों का कचरा ।
सच्ची शरणागति यह होगी,
आपके काम ग़र आ पायें ।
सच्चे दिल से, अच्छे मन से,
आपके साथ हम चल पायें ।
👣🙏🏻
24/1/18
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