खुशी की छाव(आध्यात्मिक)-332
ख़ुशी की छॉव और प्यार का तोहफ़ा,
खुदा ने हमें .....तुम दिये हो दाता ।
कोई कभी भी कहीं से आया ,
ख़ाली हाथ न कभी लौटाया ।
दुख भँजन, तुम हो मन रँजन ,
कष्ट हरण मेरे दाता ।
अन्तर की पीड़ा हरने में ,
तुम देर न लगाते हो दाता ।
करूणा की बौछार हमेशा ,
नज़रों से ही बहा करती ।
जब भी देखा , सुना कष्ट तो ,
बिन बोले पीड़ा हर ली ।
तुम्हारी महफ़िल , तुम्हारी ख़ुशबू ,
ख़ज़ाना तेरा बढ़ता रहे ।
हसरत हमारी , आरज़ू दिल की ,
मौज-ए-दाता मिलती रहे ।
जैसे भी हैं हम ..बन्दे तुम्हारे ,
बन्दगी हमेशा करते रहें ।
सजदा हमारा क़ुबूल करना ,
हमेशा तुम्हारे ही बने रहें ।
👣🙏🏻
9/1/18
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