तेरे ही विचार आज(आध्यात्मिक)-337
तेरे ही विचार आज,
भाव हैं तेरे ही साथ ।
काया तेरी , हाथ तेरे ,
क़लम है तेरी हाथ ।
तू जो जैसा चाहता है ,
चलते हैं वैसे हाथ ।
मेरी है कहॉ औक़ात ,
तू तो सब जानता ।
अच्छी बात तेरी बात ,
बुरी बात तेरी बात ।
यश-अपयश सारा ,
सब कुछ तेरे हाथ ।
रोती हूँ बिलखती हूँ और ,
चीख़-चीख जाती हूँ मैं।
सब कुछ अपनी ही ,
देन मानती हूँ मैं ।
कितना घमंड आज ,
चींटी जैसा घुस गया ।
चाहते हैं फिर भी ,
निकलता नहीं है ।
दाता आज..कर दो ,
रहम तुम मुझपै ...।
दोष सारे बह जायें ,
पानी की तरह आज ।
....तेरे ही हाथ है,
.....तेरी बान्दी की लाज ।
👣🙏🏻
15/1/18
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