प्यार वार की परिभाषा(आध्यात्मिक)-328
प्यार-वार की परिभाषा......,
कुछ मुझको समझ न आती है ।
सिर पर मेरे हाथ तुम्हारा ,
यही हकीकत भाती है ।
हाथ तुम्हारा सिर पर है यह,
ख़्वाब नहीं सच्चाई है ।
जब से कुछ-कुछ होश सा आया ,
तू ही जीवन साथी है ।
सँसारी साथी तो कितने ...आये ,
और कितने चले गये ।
तुमने कभी भी साथ न छोड़ा ,
हाथ हमेशा पकड़े रहे ।
हाथ 🤝तुम्हारे हाथ दिया है ,
पकड़ तुम्हारी है मज़बूत ।
मैंने अग़र ये पकड़ा होता ,
ना जाने कब जाता छूट ।
तुम कसकर पकड़े रहना ,
बस यही दुआ तुम करो क़बूल ।
मुझमें ख़ामियाँ कितनी भी हैं ,
फिर भी मुझे ....करो मक़बूल ।
मैं ... तुममें सदा रहूँ मशगूल ।
👣🙏🏻
5/1/18
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