कार्तिक पूनौ(आध्यात्मिक)-261
कार्तिक पूनौ(पूर्णिमा)जनम दिया था,
तुमने सँसारी जीवन जीने का ।
लेकिन यही दिन फिर से तय किया,
आध्यात्मिक(गुरुदी़क्षा)जीवन जीने का ।
माताजी ने दीक्षा देकर,
अपनापन जतलाया था ।
नर्क से सीधा हाथ पकड़कर,
स्वर्ग मुझे दिखलाया था ।
मात-पिता की गोदी मुझको,
अब तक लाड़-लड़ाती है ।
बीते दिनों की याद भुलाकर,
हर दम नया सिखाती है ।
तुम ताक़तवर पिता हो मेरे,
ऐसा पिता नहीं कोई ।
पल में जो दुनिया को बदलदे,
ऐसा नहीं दिखा कोई ।
मॉ तो मॉ है, मॉ का क्या कहना,
गोदी बड़ी है मेरी मॉ की ।
जितना चाहे उछल कूदकर,
छुप जाओ गोदी मॉ की ।
गुरुसत्ता मेरी ऐसी होगी,
ऐसा जाना ना सोचा था ।
क्या से क्या कर दिया उन्होंने,
सचमुच कभी न सोचा था ।
.... सचमुच कभी न सोचा था ।
👣🙏🏻
28/1/18
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