मन तो तुम्हारे(आध्यात्मिक)-257

मन तो तुम्हारे पास है दाता,
तन भी तो काम नहीं करता ।
धन भी तो साथ नहीं जाना है ।
कुछ भी तो समझ नहीं पड़ता ।

        पद,प्रतिष्ठा,रुपया,पैसा,
        सब इसमें ही उलझे रहते ।
        काम तुम्हारा जो कर पाते,
        फिर तो वो आसमान छूते ।

जो न कर रहा काम तुम्हारा,
उसको सब कहते हैं बेकार ।
प्रेमपाश में पड़कर तेरे ही तो,
हरदम रोता  है वो जारों-जार ।

          काम तुम्हारा...क्या करना है?
          जिससे चाहो....करा सकते ।
          और तुम्हें आता ही भला क्या?
          विरह में अपने रुला ही सकते ।

विरह वेदना वो क्या जानें,
वो सब तो पागल कहते रहे ।
जितने पागल हुये हैं तेरे वो,
सब ही तो उलाहने सहते रहे ।

           जिसको तन और मन की सुध ना,
           क्यों किस-किस को वो याद करे ।
           तेरी याद में जो हो गया अब पागल,
           वो पागल..किस-किसकी परवाह करे ।
           .....क्यों किसी के जी का जंजाल बने ।

                                    👣🙏🏻
                             30/1/18

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426