आंखन देखी(सामाजिक)-225
गुरुवर बहुत दूर की पीड़ा,
आपने जब देखी होगी ।
पीड़ा-पतन निवारण की तब,
कितनी बड़ी सोच रही होगी ।
बहुमँजिला इमारतें यहॉ पर,
मुँहबॉये खड़ी हैं चारों तरफ़ ।
लेकिन घर के बूढ़े यहॉ पर ,
भीड़ में हैं सुनसान के सहचर ।
अपने ही बच्चे आज उन्हें,
छोड़ अकेला गये विदेश ।
वृध्दाश्रम में भी छोड़ गये जो,
ना जा पाये कहीं विदेश ।
लौट न वो वापस आये,
ना ख़र्चा ही भेजा करते ।
आख़िरी दम तक याद वो करते,
अन्त में सॉसें छोड़ गये ।
अन्तिम क्रिया-कर्म भी उनका,
जैसे-तैसे किया सम्पन्न ।
बेच-बाचकर सब-कुछ उनका,
फिर से हुये वो धन सम्पन्न ।
शायद भविष्य का यही नज़ारा,
आपने देखा होगा पहले ही ।
तभी तो ये परिवार(Awgp) बनाया,
जो दे सके सान्त्वना भी ।
👣🙏🏻
18/1/18
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