तुम भूलते न मुझको(आध्यात्मिक)-268
तुम भूलते न मुझको,
मैं भी ना भूल पाती ।
दाता तेरी ये निसबत ,
है भी बहुत पुरानी ।
कुछ तो कशिश है तुझमें,
सबको वही लुभाती ।
तभी तो तेरे पीछे ,
दुनिया है दौड़ी आती ।
कुछ मन्नतें लिये हैं,
कुछ जन्नतों के ज़रिये ।
सब चाहते है तुझसे,
लेना किसी भी ज़रिये ।
औलाद की मुरादें,
या धन की आरज़ू हो ।
आते हैं तेरे दर पै,
दुखियारे सारे हैं वो ।
बीमारे-हाले आकर,
दुखड़ा सुनाके जाते ।
ताबीज़े-धागा दो या,
कोई मंत्र ही बता दो ।
मेरे यार मेरे दाता,
मुझको भी कुछ तो दे दो ।
पर्दा ये दरमियाँ से,
हटाने की तड़प दे दो ।
तेरी याद में ही तड़पूँ,
तड़पने की तड़प दे दो ।
👣🙏🏻
25/1/18
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