दिले शायरी-4
-- चाहा है तुम्हें जब से कुछ फ़िक्र न की ज़माने की
क्या कुछ इल्ज़ामात लगाते रहे हैं वो!!
--तुम्हीं में खो जाना फ़ितरत है मेरी
कैसे कहूँ हर वक़्त ख़यालों में क्यूँ रहते हो !!
--खाक में तब्दील एक दिन हो ही जाना है
जल रहा है चिराग़ तब तक तो जलने दो !!
--तुमसे मेरा याराना बड़ा वजनी हो जाता है
बाक़ी के रिश्ते बड़े हल्के हुआ करते हैं!!
--ऐसा कोई रँग लगा दो मन मेरा बच्चा बन जाये
छोटे बच्चे सा दिल हो जाये !!
--और क्या ख़्वाब देखूँ तेरी रहगुजर में रहने के
ये जिन्दगी संवर जाये चरणों की धूल से तेरे!!
@शशिसंजय
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