खुशियाँ का कोई वक्त नहीं है(सामाजिक)-232
ख़ुशियों का कोई वक़्त नहीं है,
ख़ुशियाँ हर पल में होती हैं ।
सुख और दुख में साथ ही रहतीं,
हर दिन को गीला करती हैं ।
हम ही बाबरे हो जाते हैं,
सुख तुमने अगर दे दिया ।
सब रिश्ते फीके हो जाते,
सुख का ग़र एहसास दे दिया ।
कोई हमें ना अच्छा लगता,
सुख अकेले भोगा करते हैं ।
इर्द-गिर्द रहने वालों पर,
रौब ख़ूब गॉठा करते हैं ।
दुख में भी पागल हो जाते,
तुम्हें भी ना छोड़ा करते हैं ।
लगता जैसे क्या कर दिया,
कितना तुम्हें पूजा करते हैं ।
अपने-पराये हो जाते हैं,
जब दुख आ जाया करता है ।
अपनों की पहचान भी होती,
जो दुख में साथ निभाता है ।
👣🙏🏻
15/2/18
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