सँसारी रिश्तों में देखो(सामाजिक)-251
सँसारी रिश्तों में देखो,
ना जाने कितने रिश्ते हैं ।
तेरा ही रिश्ता सबल प्रबल है,
बाक़ी रिश्ते सब झूठे हैं ।
जनम-जनम ही मिलते रहते,
बदल-बदल कर ये रिश्ते ।
एक नहीं बदले तुम दाता,
उसी रूप में हमेशा मिलते ।
तेरा रिश्ता और तेरा मिलना,
कितना गहरा ये नाता है ।
भीतर में धँस जाते हो तब,
बाहर लाना पड़ता है ।
लुका-छिपी तुम खेला करते,
हर पल मुझसे क्यों दाता ।
तुम्हारी तरह यूँ प्यार जताना,
मुझको तो ऐसे नहीं आता ।
अपनी तरह बना करके तुम,
पावन मुझको कर डालो ।
फाल्गुन महीना शुरु हो गया,
अब तो मुझको रंग डालो ।
.....तरह-तरह से रंग डालो ।
....गुणों की पिचकारी मारो ।
👣🙏🏻
3/2/18
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