तरह-तरह के रँगों से(सामाजिक)-202
तरह-तरह के रँगों को
पानी में जब घोला जाता है
जो रँग डाला जाता है
पानी उस रँग का होता है
हर रँग के रँग में रँग जाना
पानी की ये फ़ितरत है
कैसा करिश्मा पानी का
ये कैसी पानी की क़ुदरत है
पानी की तह में कुछ भी डालो
भीतर से वो दिखता है
पारदर्शिता देकर वो अपनी
सबको ख़ुश कर देता है
ऐसे ही हम सब हो जायें
अच्छे रँगों में ख़ुद ढल जायें
भीतर-बाहर एक से रहकर
ख़ूब हँसें और ख़ूब हँसायें
छोटा बच्चा फिर बन जायें
रूठ के फिर अब्बा हो जायें
👣🙏🏻
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