चरण दबाती हूँ जब तेरे(आध्यात्मिक)-253
चरण दबाती हूँ जब तेरे,
मुझको क्या हो जाता है ।
चरणों में बस पड़ी रहूँ मैं,
ऐसा मन हो जाता है ।
सुना था मैंने चरण तुम्हारे,
कमल का फूल दिखा करते ।
उन चरणों की कीचड़ हूँ मैं,
तुम ही उसको धोया करते ।
चलते हो तब चरणों में जो,
धूल है लग जाया करती ।
वही धूल तो हूँ मैं प्यारे,
जिसको दुनिया छिटका करती ।
बाहर जाते हो जब भी,
तब जूती तुम पहना करते ।
वही तो जूती हूँ मैं दाता,
जिसको तुम चमकाया करते ।
तुम्हारे चरणों की गाथा,
मैं कैसे बतला सकती हूँ ।
ख़ुशी से छलकती इन ऑखों से,
कुछ अश्रु बहाया करती हूँ ।
मेरे कन्हैया मुझ पर केवल,
इतना सा उपकार करो ।
याद में जब-जब तड़पूँ तेरी,
तब-तब तुम ही प्यार करो ।
......मेरी तुम ही लाज रखो ।
........मेरा तुम उद्धार करो ।
👣🙏🏻
2/2/18
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