धुंधली यादें-(216)
आज अचानक मुझको कैसे,
अपना बचपन याद आ गया ।
मॉ की गोद में बैठना मुझको,
आज अचानक याद आ गया ।
छोटी-छोटी बातों पर मैं,
ज़िद कर जाया करती थी ।
घर के ऑगन में लोट-पोट कर,
ख़ूब ही रोया करती थी ।
प्यार से मॉ का लाड़-लड़ाना,
गोद उठा ऊपर ले जाना ।
दूर कहीं चन्दा दिखलाना,
मामा कहकर उन्हें बुलाना ।
सारी बातें अब भी मुझको,
याद कभी आ जाती हैं ।
प्यार से मुझको बुद्धू बनातीं,
ये यादें बहुत सतातीं हैं ।
अक्सर लोग कहा करते हैं,
"बूढ़ा है सठिया गया है"
लगता मुझको "सठियाया"नहीं,
वो बचपन लौटा लाया है ।
"बूढ़ा बच्चा एक समान"
ऐसा लोग कहा करते हैं ।
तभी तो मेरे बच्चे मुझको,
बच्चा छोटा समझा करते हैं ।
........मस्त हँसाया करते हैं ।
......लाड़-लड़ाया करते हैं ।
👣🙏🏻
2/2/18
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