तेरा नाम आये जुबां पर मेरी(आध्यात्मिक)-205
तेरा नाम आये जुबॉ पर मेरी,
मगर होंठों पै आके ही वो रह गया ।
तू चला ही न जाये नज़र से मेरी,
तुझको जाते हुये देखता रह गया ।
कुछ तो बोलूँ-बुलाऊँ तुझे मैं मगर,
तूने मौक़ा ही मुझको दिया ना कभी ।
चाहने वाले तेरे घिरे ही रहे,
मुझको मिलने दिया तुझसे ना कभी ।
वो भीड़ जो घेरे रही ता उमर,
अब देती नहीं है दिखाई कभी ।
तुम तो आज भी वहॉ पर मौजूद हो,
उनको देते नहीं हो दिखाई कभी ।
झूठ लेकर चले थे जो सारी उमर,
आज वो ही ख़ुशी से झूमा किये ।
जो सच से लिपटते रहे उम्र भर,
छलावे ही उनको छलावा किये ।
अकेले ही तुमने झेला सभी,
ऑधियों के झमेले जो आते रहे ।
तुम देते रहे ख़ुशियों का सिला,
लोग ले-ले के तुमसे ही जाते रहे ।
....दोनों हाथों से तुम तो लुटाते रहे ।
...झोलियॉ भर के सब लोग जाते रहे
👣🙏🏻
23/2/18
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