रंग-बिरंगे फूलों से दाता(आध्यात्मिक)-230
रंग-बिरंगे फूलों से दाता,
तुमको नहलाया करते हैं ।
इसी तरह कुछ अपनी होली,
सब साथ मनाया करते हैं ।
फागुन आते ही मेरे मन में,
सब रंग अँगड़ाइयॉ लेते हैं ।
तरह-तरह के रंग आकर के,
अपनी-अपनी दुहाइयॉ देते हैं ।
किस-किस को समझाऊँ मैं,
किस-किस को तसल्ली दिया करूँ ।
मुझको तो रंग दो ही हैं प्यारे,
काम में सबको क्यूँ लिया करूँ ।
केसरिया रंग जो है तुम्हारा,
उसको प्यार में करती हूँ ।
पल-पल में वैराग्य जगा दे,
उसको हर पल साथ रखती हूँ ।
लाल रंग की चुनरिया मेरी,
तेरी याद सदा दिलवाती ।
तभी तो ओढ़े लाल चुनरिया,
मैं हर दम तेरे पास है आती ।
👣🙏🏻
17/2/18
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