होली का उत्साह आज फिर(व्यक्तिगत)-233
होली का उत्साह आज फिर,
कैसा बसन्त ले आया है ।
चिड़ियायें चहचहा उठी हैं,
चारों तरफ़ ही जोश छाया है ।
घर की छत पर दाना चुगने,
कुछेक कबूतर आ जाते हैं ।
प्यार से दाना खाते-खाते,
आपस में चोंच लड़ाते हैं ।
छोटी गिलहरी उछल कूद कर,
खिड़की से अन्दर आ जाती है ।
अभी तक अकेली आती थी वो,
अब दूजी को भी ले आती है ।
दोनों मिलकर उछल-उछल कर,
मेरे हाथ से कुछ भी खाती हैं ।
बाद में दोनों मुझे चिढ़ाकर ही,
लड़ती-एक दूजे पै चढ़ जाती है ।
रंग-बिरंगी इक प्यारी सी चिड़िया,
मेरे पास चली आती है ।
प्यारा सा संगीत सुनाकर,
जाने कहॉ वो खो जाती है ।
भौंरे भी फूलों पर मँडराकर,
प्यार के गीत सुनाते हैं ।
बसन्त पर्व,फाल्गुन का महीना,
कितना उल्लास जगाते हैं ।
👣🙏🏻
14/2/18
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