तुम्हारे काम में लग जाना(आध्यात्मिक)-199
तुम्हारे काम में लग जाना,
तुम्हारी याद में खो जाना ।
ऐसी ही कुछ दशा हो गई,
सामने हर छिन हर पल पाना ।
तुमसे पूछूँ, तुमको ढूँढूँ,
बस यही तो बात किया करती हूँ ।
जैसे भी हो केवल तुमको,
अपने पास रखा करती हूँ ।
आस-पास में मेरे केवल,
तुम ही तुम तो रहते हो ।
अन्दर में जब झॉका करती,
देख के तब तुम हँसते हो ।
ऑंख मिचौली खेला करते,
तुम भी तो जब मन करता है ।
मैं भी वही शरारत करती,
जैसे तू भी खेला करता है ।
ज्ञान नहीं है ध्यान नहीं है,
कुछ भी आता मुझको नहीं है ।
केवल-केवल तुझे चाहना,
और तो कुछ भी चाह नहीं है ।
👣🙏🏻
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