आंखन देखी(सामाजिक)-222

ऑखन देखी
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एक दिन बहुत उदास सी
बच्ची मुझसे कहने लगी
आन्टी मेरे ससुर बहुत अच्छे हैं
सास...नहीं
मैं सोचने पर मजबूर हो गई
आख़िर.....ऐसा क्यों ?
औरत ही औरत की
दुश्मन क्यों है ?
सास-बहू की,ननद-भाभी की
जिठानी-देवरानी की,पड़ोसन-पड़ोसन की
सहेली-सहेली की,सौतन-सौतन की
प्रेमिका-पत्नी की
अगर आप ग़ौर फ़रमायें
ये तमाम महिलायें हैं
हम आपस में
जलना कब छोड़ेंगी
एक-दूसरे का सहारा
कब जाकर बनेंगी
वो दिन कब आयेगा...
जब कोई बच्ची मुझसे
लिपटकर कहेगी
आन्टी मेरी सास ननद जिठानी
सब बहुत ही अच्छीं हैं
सच...कह रही हूँ....आन्टी
बिलकुल...पक्का सच

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