तेरी चाहत तुझे चाहना(आध्यात्मिक)-250
तेरी चाहत, तुझे चाहना,
यही भरोसा मेरा है ।
दुनिया से कुछ नहीं चाहना,
तू ही आसरा मेरा है ।
तूने थाम लिया जब मुझको,
और सहारा क्यों ढूँढूँ ।
आशीषें कितनी हैं मुझ पर,
ढेर दुआयें क्यों भूलूँ ।
सबने मुझको छोड़ दिया,
पर तूने थामे रखा है ।
अपनों से जो दर्द मिले हैं,
वो तू ही भुलाये रखा है ।
भीड़ भरे मेले में सबने,
मिलकर मुझको लूटा है ।
भावुक रिश्तों का हर धागा,
तेरे ही हाथों से टूटा है ।
जग हँसाई करे भले ही,
मुझको तो अब लाज नहीं ।
रँग में तेरे रँग ली चुनरिया,
अब मुझको कोई काज नहीं ।
अपने हाल में मस्त है रहना,
तूने ही मुझको सिखाया है ।
जब से तूने ख़ुद से जोड़ा,
जग से मुझको छुड़ाया है ।
👣🙏🏻
4/2/18
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