मुर्शिद मेरे होली के दिन(आध्यात्मिक)-200
मुर्शिद मेरे होली के दिन,
आज बचे हैं दो ही चार ।
रँगों की बारिश कर देना,
अन्तरंग में बिखरे प्यार ।
रँगना लाल सुहाग की चुनरी,
मन मेरा कर देना पीला ।
प्रीत के चरणों में जाते ही,
अन्तरमन हो जाये गीला ।
नीला रँग कान्हा के तन का,
मुझको भी नीला कर देना ।
देख के सबको मिले शान्ति,
शान्ति भरा जीवन कर देना ।
हरे रँग से भर देना तुम,
मेरे जीवन में हरियाली ।
ख़ुशहाली भी दे देना तुम,
बाटती रहूँ ख़ुशियों की थाली ।
केसरिया रँग से भर देना,
मेरे जीवन में वैराग्य ।
राग-द्वेष सब निकल के भागें,
जिनसे होता सबसे नैराश्य ।
काले रँग से कर देना तुम,
भीतर का कालापन साफ़ ।
रँग सफ़ेद देकर कर देना,
निर्विकार रहने के भाव ।
और क्या बोलूँ होली पर मैं,
तुम तो रहोगे सदा ही साथ ।
रँग-बिरंगे दुर्गुण मेरे,
करते रहोगे हरदम साफ़ ।
👣🙏🏻
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