दिल के भीतर(आध्यात्मिक)-234
दिल के भीतर एक छोटा दिल है,
ना जाने क्या-क्या कहता है ।
पता है वो तुम्हें किसका दिल है,
जो बातें किया ही करता है ।
जो बक-बक करता,मेरा दिल है,
तुम तो शान्त रहा करते हो ।
कुछ भी कर लो,कुछ भी सुन लो,
एकटक ही देखा करते हो ।
ये अदा तेरी बहुत भाती है,
इसीलिये सब आते हैं ।
तरह-तरह की बातें तुझको,
ख़ूब बताकर चले जाते हैं ।
सबको पूरा भरोसा है,
तू एक दिन सबकी सुनता है ।
देर है अन्धेर नहीं है,
तू काम भी पूरे किया करता है ।
मैं तो समझ नहीं पाई हूँ,
मेरी अकल तो कच्ची है ।
जो-जो बात किया करते,
क्या सबकी बात ही सच्ची है।
मुझको तो बस इतना पता है,
तुम साथ सभी के रहते हो ।
फिर ना जाने क्यों सबको,
मन्दिर-मस्जिद भटकाते हो ।
👣🙏🏻
13/2/18
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