साथी साथ निभाना(पारिवारिक)-235
कितनी जल्दी बीत गये ये,
जीवन के अब छियासठ साल ।
जोड़ के देखो तो लगते हो,
केवल उमर है बारह साल ।
वही बोलना,वही उछलना,
दिन भर मस्ती करते रहना ।
बच्चों जैसी निश्छलता है,
जो मन में हो वह कह देना ।
सोच-समझ कर बोल न पाते,
अपने ही हाल में जीना और रहना।
कितनी मैं ख़ूबियॉ गिनाऊँ,
मेहनत सबसे ही ज़्यादा करना ।
काम करने के बुलबुले घूमते,
चैन न लेते हैं थोड़ा सा भी ।
चलते-फिरते ही रहना तुम,
हमेशा सबके बीच में रहना ही ।
मेरी उमर तुम्हें लग जाये,
जियो हज़ारों साल ही तुम।
जब तक जिऊँ तुम साथ निभाना,
अपने कँधों पै ले जाना तुम ।
जन्मदिन पर मेरे इस जीवन के साथी,परमप्रिय पतिदेव "जॉय" को बहुत-बहुत बधाई
11/2/18
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