गुरु चरणों की गाथाएं(आध्यात्मिक)-229
गुरू चरणों की गाथायें,
मैं कब से सुनती आई हूँ ।
जब से चरण में तेरे बैठी,
क्या-क्या गुण मैं पाई हूँ ।
चरणों में सजदा करने का,
भाव अलग ही होता है ।
तेरी कृपा के आगे मेरा दिल,
हरदम तुझसे जुड़ा रहता है ।
चरणों में अश्रु की धारा,
बरबस ही बहने लगती है ।
प्यार में लिपटी अमृतवाणी,
मेरे कानों में पड़ने लगती है ।
चूमते ही तेरे चरणों को,
जाने क्या हो जाता है ।
हिलोरें लेता प्यार का सागर,
उमड़-घुमड़ने लगता है ।
चरणों में गिरते ही तेरे,
मेरे कान बन्द हो जाते हैं ।
शरण में तेरी,शरण में तेरी,
शब्द निकलने लग जाते हैं ।
......भाव भी बहने लग जाते हैं ।
.......कुछ भी कहने लग जाते हैं ।
👣🙏🏻
19/2/18
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