ख़ुश हुये तो क्या हुये(आध्यात्मिक)-201
ख़ुश हुये तो क्या हुये,
क्यूँ ग़म से घबराया किये ।
दिल की तह में घुस गये,
फिर ख़्वाब क्यों आया किये ।
दूर जाके हमसे क्यूँ फिर,
हरदम याद ही आया किये ।
पूँछने पर शर्म से वो,
जाने क्या-क्या कह दिये ।
मैं तसब्बुर हूँ तुम्हारा,
तुम चाहा ही मुझसे क्या किये ।
मेरे दिल की धमाल में,
सुर-ताल तुमने क्या किये ।
सुबह-सुबह किस हाल में,
तुम फिर मुझे छोड़ा किये ।
शाम आते ही मुझे फिर,
मलाल में मिला किये ।
👣🙏🏻
25/2/18
टिप्पणियाँ
जीवन की इस आपा धापी में कविताएँ ओर हिन्दी भुला कर सौ गए। आपकी सुन्दर कविताएँ पढ होश आया और अब उसमें खो गए।
एक टिप्पणी भेजें