दिले शायरी-12
घर में घुसते हैं लोग रो - रोकर,
जगह बनाते हैं अपनी रो - रोकर,
जगह अपनी हुई ख़ुदा अपना हुआ,
अब जमाने को दिखा ऑखें,
..................... लगा ठोकर?
--तुमने जो मुझे डाल रखा है, ख़ुद के चरणों में,
सोच लो उन कदमों में, दाग तो नहीं लग जायेगा।
मैं तो कीचड़ हूॅ नाली का, सड़न की मुझे है आदत,
मेरी कीचड़ तेरे कदमों में लगे,
ये भला कैसे गवारा होगा मुझसे।
......... कब तक छुपाओगे ताकतें अपनी हमसे,
मिटाने औ बनाने का हुनर, अपने पास रखते हो।
दुनियॉ को दिखाने को तुम, और क्या. क्या कहते हो,
दे दोगे कभी मुझको भी, बनाने औ मिटाने की कुब्बत।
@शशिसंजय
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