दाता आज बना लो(आध्यात्मिक)-311

दाता आज बना लो मुझको
अपने गले का हार।
आपकी धड़कन आपकी पुलकन
, छूती रहे हर बार।
गले आपके पड़कर माला,
कितना यूॅ इठलायेगी।
छूकर पिय को बार - बार,
किस्मत पर हर्षायेगी।
सुख - दु:ख आपके सारे उसके,
पड़ी रहे ना यूॅ बेजार।
प्यार से उसको जब नहलायें,
कटेंगे सारे पाप अधार।
दाता का कठुला (हार) है बनकर,
कंठ से आये मधुर आवाज।
दिल की धड़कन छू-छू कर वो,
करना सीखे सबसे प्यार।
माला बनने की चाहत में,
घायल कितना होना है।
तब जाकर वो हार बनेगी,
दाता की प्यारी होगी।
कोई न जाने, कोई ना बूझे,
कितनी वो न्यारी होगी।
दाता मुझ पर कृपा करेंगे,
गले लगायेंगे वो आज।
आज कलेजे उनके लगकर,
रोना मुझको जारों - जार।
"जिन्दगी की ख़ामियॉ,
होली पै हों ख़तम।
प्यार हो सबके लिये,
कुछ ऐसा हो करम।
जिन्दगी के रंग हों,.....
कुछ ऐसे लाजबाब।
तुम भूल सको ना मुझको,
बस इतना सा है ख्वाब। "
                                - - - - - - - - - 9/3/09

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