जन्मदिन किसका(व्यक्तिगत)-285
जन्मदिन किसका,
इस जीवन का।
फ़िर भी खुशी से दिया,
जलाते हैं घी का।
सार्थक हो जीवन,
जब मिले मन से मन।
कृपा हो उनकी तो,
खिले खुशी से मन।
तन हो स्वस्थ,
मन हो प्रसन्न।
भगवान में हो,
मेरा पूरा समर्पण।
तन लगे उन्ही में,
ये मन लगे उन्हीं में।
न भटके ये जीवन,
जिन्दगी के सफ़र में।
खुशियॉ तमाम घूमें बस,
पिय के ही घेरे में।
दु:ख की ये चादर हम,
ओढ़े रहे अॅधेरे में।
गुरू की कृपा से ये,
कश्ती यूॅ चलेगी।
दाता के प्यार में ये,
उम्र यूॅ ढलेगी।
जैसे कोई लाड़ली,
मॉ बाप की हथेली में।
बैठकर आ जाये यूॅ,
पिय के ऑगन में।
दोनों का ही प्यार,
उसे भूले नहीं भूले।
पिय की निगाहें,
और पीहर के झूले।
जन्म भी उन्ही का,
ये जीवन उन्हीं का।
काम वो कराते रहें
अपने ही मन का।
काया उन्हीं की और,
काम भी उन्हीं का।
हर जन्म साथ रहे,
केवल उन्हीं का।
"हर जन्म है उनके हाथों में,
हर मौत है उनकी मुट्ठी में।
ना जाने कितनी सदियों से,
ये जीवन उनकी मुट्ठी में।
हे प्रभु बस इतनी दया करना,
मेरे अपने ही बने रहना।
गुरु रूप सही, पिय रूप सही,
बस मुझको तुम पकड़े रहना। "
- - - - - - - - - 19/11/05
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