नाम-प्रेम यश(आध्यात्मिक)-294

नाम - प्रेम, यश - अपयश, इच्छा,
गुरुवर मेरी चाह मिटा दो।
बनी रहूॅ चरणों की दासी,
ऐसी मेरी आस जगा दो।
मॉ का पल्लू, आपकी ऊॅगली,
मेरा सहारा बनी रहे।
दाता के चरणों की दासी,
साथ हमेशा चलती रहे।
घर है छोटा गुरुवर दाता,
इसमें आप समा जाओ।
माताजी के वटवृक्ष के,
छॉव तले पलती जाऊॅ।
कुछ भी करके गुरूवर मेरे,
अहंकार को मथ डालो।
छुटपुट बातों से यह विचलित,
इसको आज कुचल डालो।
वृक्ष विशाल बने यह चिन्तन,
सबको शीतल छॉह मिले।
काया आज बना दो ऐसी,
सबको इससे दिशा मिले।
परम पुनीत बना दो मुझको,
छोटी सी बच्ची बन जाऊॅ।
मात-पिता के आगे पीछे,
घूम घूम कर मैं इठलाऊॅ।
भोलापन और सहज सरलता,
मुझको गुरुवर आज पिला दो।
अपनी इस दासी को दाता,
अपनेपन में आज मिला दो।
                          - - - - - - - - - 7/6/09

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