जन्मदिन 10/7/14(व्यक्तिगत)-296

मैं बुझता चिराग, तुम जलते दिये हो।
मेरा प्यार आशा तुम, संग में लिये हो।
--रहूॅ ना रहूॅ आशीष मिलते रहेंगे।
तुम्हारी दुआ को, हाथ उठते रहेंगे।
--मेरा पूर्ण विश्वास, संबल हो तुम ही।
भरोसा हो मेरा, और ताकत हो तुम ही।
--जन्मदिन तुम्हारे मैं क्या दूॅ उपहार।
तुम पॉचों ही मेरे, गले का हो हार।
--प्यार और गुस्सा ही, मेरे आशीष।
गुरु की कृपा मिले, औ मिलें देवाशीष।
--गुरु कृपा तुम सबका, करती रहे उद्धार।
कमी न आए कुछ भी, बस बढ़ता रहे प्यार।
--छोटी - छोटी बातों को दिल से रखना दूर।
एक दूसरे प्यार तुम, करना भरपूर।
--बन्द मुट्ठी (एकता) देखकर लोग थर्रायेंगे।
तुम्हें हानि पहुंचाने, कोई कभी न आयेंगे।
--तंगहाल जिन्दगी के अलग ही मजे हैं।
भौतिकता ने रिश्तों, के मायने तजे (त्याग) हैं।
--जैसे भी हो तुम सब, खुशहाल रहना।
एक दूसरे के प्यार की ढाल बनकर रहना।
--यही आशीष मेरी दुआयें यही हैं।
खुशियॉ हों पास, मेरा प्यार यहीं - कहीं है।
                              10/7/14 जन्मदिन

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