प्यारे दाता आप बिना(आध्यात्मिक)-313
प्यारे दाता आप बिना अब,
सब कुछ सूना लगता है।
घर गलियॉ और आश्रम सूना,
सब कुछ सूना लगता है।
दिल के भीतर का वो कौना,
वो भी सूना लगता है।
मन के भीतर का उल्लास,
वो भी सूना लगता है।
किसको कहूॅ मैं प्यारे दाता,
कैसा मेरा हाल हुआ।
कैसे बताऊँ तुम बिन दाता,
कैसा बज्राघात हुआ।
अब तो आकर देखो दाता,
मन मेरा कितना बेचैन।
जाऊॅ कहॉ मैं तुम बिन दाता,
बाट निहारूं मैं दिन रैन।
एक बार तो आकर दाता,
मन को मेरे धीर धरो।
अपनी इस प्यारी बान्दी को,
फ़िर से - फ़िर से प्यार करो।
भटकन रहती मन में मेरे,
इस भटकन को रोको तुम।
मन को मेरे आप बॉध लो,
चरणों में रख लो मुझको तुम।
फ़िर ना कहना मैंने तुमको,
पहले क्यूॅ न बताया था।
बार - बार रो रोकर मैंने तुमको,
कितना नहीं पुकारा था।
मेरे दाता अब तो आकर कर दो,
मुझको फ़िर से निहाल।
मन की पीड़ा को दूर करो तुम,
आ जाओ अब तो हर हाल।
- - - - - - - - - 19/2/16
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