बावन पत्ते झड़ चुके(व्यक्तिगत)-286

बावन पत्ते झड़ चुके,
डाली से गुरूदेव।
जड़ें खोखली हो चुकीं,
जड़ता रही न शेष।
ऐसे जीवन का जन्मदिन,
कैसे हो गुरुदेव।
जड़ में सिंचन आपसे,
हर - पल मिले तो होय।
पत्ता - पत्ता झड़ चुका,
धुलना तो था दूर।
कैसे सारी ख़ामियॉ,
मुझसे हों काफ़ूर।
जड़ में मिट्टी आपकी,
खाद - पानी सब होय।
  तब जाकर तुझमें मिलूॅ,
तब तेरे माफ़िक होय।
  अपना ही दे दीजिये,
मुझको सारा ध्यान।
  जप तप पूजा पाठ से,
ना होगा कल्याण।
  मेरे दाता देख लो,
वक्त तो बीता जाये।
  पथराई अॉखें थकीं,
तुमको तरस न आये।
  इस जीवन में आपसे,
हुये न एकाकार।
  भक्त और भगवान के
बीच बढ़े तकरार।
  केवल तू ही - तू ही, तू है,
मेरा ना कुछ, "मैं" भी तू है।
फ़िर यूॅ प्यासी तड़प सी क्यूॅ है,
तड़प - तड़प कर तड़प भी तू है।
  प्रीतम प्यारे तड़प आपकी,
फ़िर भी आप तड़पते होंगे।
कैसी होगी प्यारी सूरत,
जब आॅख से ऑसू झरते होंगे।
                        - - - - - - - - - 19/11/08

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