तुम्हारे बिना(व्यक्तिगत)-305

तुम्हारे बिना घर
कितना वीराना था,
सब तो घर में बस
एक ही अफ़साना था।
तुम ये करते, तुम ये कहते,
सब अपनी अपनी यादें कहते।
बातें होंगी बीता जमाना,
तुम फ़िर से अब लौट के आना।
जायेंगे फिर साथ. साथ हम,
जीजू भाभी दादा हम सब।
सन्यासी बनकर आओगे,
बहना के दिल पर छाओगे।
जीजू भाभी हॅसेंगे तुम पर,
करते रहते ढोंग ये दिन भर।
अब तुम सचमुच लौट भी आना,
आने पर पहचान बताना
किसके घर में, किसके गर्भ में,
किसकी गोदी में खेलोगै।
प्यारे दादा फ़िर से बोलो,
तुम मुझसे फ़िर ना बोलोगे।
अब तक थी मैं छोटी बहना,
अब तो बड़ा ही बनना होगा।
तुमको मेरी ऊॅगली पकड़कर,
आगे आगे चलना होगा।
तुम रोओगे मैं डाटॅुगी,
तुम रोओगे मेैं मारूॅगी।
फ़िर तुम हॅसकर प्यार करोगे,
मैं अब्बा हो बात करूॅगी।
ऐसा कुछ होगा अफ़साना,
दादा मेरे लौट के आना।
                                  .............. 18/1/08

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