अश्क(आध्यात्मिक)-347
दाता आकर आज आपने,
कहीं जो मुझसे प्यारी बातें।
मन में ये विश्वास जगा है,
जगते बीती आपकी रातें।
..... मैं ना भूल सकी हूँ तुमको,
तुम भी कैसे भूल पाओगे।
जब भी समय मिलेगा तुमको,
मेरे पास तुरन्त आओगे।
...... प्यारा चेहरा प्यारी बातें,
मुझको बहुत रुलाती हैं।
हर पल आती याद आपकी,
बीती बातें बहुत सताती हैं।
........ प्यार आपने बहुत दिया है,
ये मैं कैसे भूल पाऊंगी।
ये अहसास बराबर दोगे,
तो मैं भटक नहीँ पाऊंगी।
........ मेरे दाता आपने मुझको,
दिल से अपना बनाया है।
तभी तो मेरे दिल में रहकर,
अपना अश्क दिखाया है।
............ 28/2/16
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