जन्मदिन(पारिवारिक)-228

संकट हरण (हनुमान जी) की देन तुम, सबसे सुन्दर लाल।
अन्दर की छमता भुलाकर, हो रहे तुम बेहाल।
--क्या करूॅ, कैसे करूँ, यह समझ नहीं आता।
हालत तुम्हारी देखकर, मन मेरा घबराता।
--जिसने तुमको शक्ति दी, तुम करो उसी से बात।
हनुमत की सब कृपा से, सुधरेंगे सब हाल।
--गुणों से भरपूर तुम, बस, एक अवगुण आज।
गदा उठाकर वाणी की, तुम खुद होते बेहाल।
--खोई ताकत मॉगकर, तुम उठ जाओ फ़िर आज।
रखो भरोसा ईष्ट पर, जो करते मालामाल।
--दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।
संकट कटै मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलवीरा।
--करो भरोसा आज तुम, इस बूढ़ी मॉ पर आज।
प्यार करो इस काया से तुम, बिगड़े बनेंगे काज।
--जो भी करो, जैसे भी करो, तुम सबसे पहले स्वस्थ बनो।
शान्त भाव में रहकर तुम बस, अन्तर्मन से बात करो।
--फूलो और फलो तुम सब ही, यही दुआ मैं करती हूॅ।
जहॉ भी जाओ नाम कमाओ, ऐसा भरोसा करती हूॅ।
                                     30/8/14 जन्मदिन

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