सेवानिवृत्ति 29/2/12(आध्यात्मिक)-297
क्या कहूँ मैं आपकी,
निष्ठा का पारावार।
हर चुनौती पूर्ण करता,
रहा गुरु का प्यार।
--आपके विश्वास से,
चलती रही काया।
ऐसे गुरु हैं आपके,
कोई जान ना पाया।
--रात भर जगना तथा,
दिन में भी कम सोना।
दूसरों के हित में अपना,
हर समय देना।
--गुरु के प्रति विश्वास आपको,
नया जोश देता।
तभी तो इतनी मुश्किलों को,
कोई कैसे ढोता।
- - भार सारा गुरु के ऊपर
डाल देते आप।
मस्त रहो सब ठीक होगा,
ऐसा कहते आप।
--छल, बड़प्पन, ईर्ष्या से,
रहते कोसों दूर।
सहज, निश्छल आचरण
ही रहा बदस्तूर।
--कौन कहता सेवानिवृत,
आज हुये हैं आप।
सेवा ही जिसका धर्म हो,
बस एक ऐसे आप।
--गुरु कार्य में जीवन हमेशा,
आपका लगता रहे।
जीओ हजारों साल,
ऐसी कामना हम कर रहे।
29/2/12 सेवानिवृति
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