दाता कुछ ऐसा कर दो(आध्यात्मिक)-278

दाता कुछ ऐसा कर दो,
चरणों में हो पूर्ण समर्पण।
इधर-उधर ये मन ना भटके,
रहे हमेशा मन ये अर्पण।
जीवन अब घट रहा है दाता,
छिन-छिन, पल-पल घटता जाता।
बरसा दो अब, प्रेम की धारा,
वरना सब रह जाये अधूरा।
प्यारे दाता कुछ तो कर दो,
मन को हर लो, चिन्ता हर लो।
और न जाने क्या - क्या हर लो,
बदले में बस दे दो समर्पण।
मेरे दाता, अपने दाता,
मन इन्द्रियॉ सब कुछ अर्पण।
काया अर्पण, माया अर्पण,
कहने को ये ना हो अर्पण।
सचमुच आप ये सब कुछ हर लो,
बदले में बस दे दो समर्पण।
दानव - तारक भोले दाता,
मेरे अपने प्यारे दाता।
अन्तहीन सागर में भर दो,
अमृत की बस अविरल धारा।
समझ नहीं मुझको कुछ आता,
मन इतना क्यूॅ घबरा जाता।
बेल हूॅ मैं बस जरा - जीर्ण सी,
आश्रय मेरा प्रबल हैं दाता।
देने को कुछ पास नहीं है,
लेने को मन करता है।
ऐसा क्यूँ ये छोटापन है,
हृदय विशाल बना दो दाता।
मेरे प्यारे अपने दाता,
अच्छे दाता, सच्चे दाता।
पूर्ण समर्पण दे दो दाता,
मनोभाव सब हर लो दाता।
                                     - - - - - - 12/9/08

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